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इतिहास और राजनीति >> ताजमहल मन्दिर भवन है ताजमहल मन्दिर भवन हैपुरुषोत्तम नागेश ओक
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पी एन ओक की शोघपूर्ण रचना जिसने इतिहास-जगत में तहलका मचा दिया...
भारत सरकार का पुरातत्त्व विभाग किस प्रकार शिथिल रहा यह उसका स्पष्ट उदाहरण है। अपने प्रशासकीय केन्द्र से बहुत दूर खुले जंगली मैदानों में खुदाई का कार्य करने में वे करोड़ों रुपया प्रतिवर्ष व्यय करते हैं किन्तु अभी तक भी ताजमहल के लाल पत्थर के बरामदे से नीचे को भूतल तक कदाचित् उससे भी नीचे नदी के जल-स्तर तक की मंजिलों को खोलने में आनाकानी करते जा रहे हैं। उपरिलिखित दो द्वारों में लगी ईंटों को उखाड़ने में सौ रुपए भी कदाचित् व्यय न हों और तब भी स्वयं ताजमहल के सम्बन्ध में और इतिहास के अन्य पहलुओं से सम्बन्धित छिपे हुए शिलालेख, पाण्डुलिपि, कोश, प्रतिमाएं और अन्य कक्षों तथा मंजिलों की ओर जानेवाली छिपी हुई सीढ़ियाँ आदि अनेक बहुमूल्य प्रमाण उपलब्ध होंगे।
हमारी यह खोज कि ताजमहल १७वीं सदी का इस्लामिक स्मारक होने से दूर यह कहीं अधिक प्राचीन हिन्दू प्रासाद है, पर्याप्त प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है। अनेक पर्यटन अधिकरण और गाइडों ने अब ताजमहल को यौन-प्रेम का प्रतीक बताना बन्द कर दिया है। विशेष आग्रह करने पर अब गाइड लोग प्रचलित परम्परा के विपरीत हमारी खोज के विषय में भी बता देते हैं।
एक और उल्लेखनीय प्रतिक्रिया पाकिस्तान के उर्दू दैनिक नवा-ए-वक्त के फरवरी १९७४ के एक अंक में प्रकाशित एक विवरण से व्यक्त हुई है। उस विवरण में आशंका व्यक्त की गई है कि भारत सरकार ताजमहल का नाम अशोक महल के रूप में परिवर्तित करने का विचार कर रही है। यह तथ्य उस समय प्रकट हुआ जब पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेम्बली में एक सदस्य ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया कि ताज के नाम-परिवर्तन के सम्बन्ध में भारत सरकार के पास शिकायत दर्ज करें।
स्पष्टतया भ्रान्तियों का पुलिन्दा इस सारे के विषय में फैला हुआ है। प्रथमतः, भारत सरकार ने ताज के नाम-परिवर्तन के विषय में कभी सोचा ही नहीं, द्वितीयतः, भारत सरकार स्वयमेव ताजमहल का नाम अशोक महल नहीं रख सकती जब तक कि वह सुनिश्चित खोज द्वारा यह निश्चित नहीं कर लेती कि ताजमहल का निर्माण प्राचीन सम्राट अशोक ने किया था। तृतीयतः, यदि ताजमहल का नाम परिवर्तित करना ही हो तो पाकिस्तान का इससे कुछ लेना-देना नहीं, क्योंकि ताजमहल भारतीय सम्पत्ति है। चतुर्थतः, ३०० वर्ष पुरानी धारणा कि ताजमहल शब्द इस्लामिक है, क्योंकि इसका आधार मुमताज़ है, स्वयं में असंगत है। मुमताज शब्द का अन्त 'ज़' से होता है जबकि ताज का 'ज' से, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ताज का मुमताज़ से कोई सम्बन्ध नहीं है। सर्वाधिक, यह तो सन्देहास्पद है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज़ दफन भी है कि नहीं, क्योंकि सुदूर बुरहानपुर में उसका मकबरा सही-सलामत है और इसलिए कि भी समस्त शाहजहाँ की कहानी में मुमताज़ के ताजमहल में दफनाए जाने की कोई भी तिथि उल्लिखित नहीं है। यह भी महत्त्वपूर्ण है कि मुमताज़ के ताजमहल में दफनाए जाने से भी पूर्व यह भवन ताजमहल नाम से प्रख्यात था जैसा कि समकालीन फ्रांसीसी पर्यटक टैवर्नियर ने इसका उल्लेख किया है।
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- प्राक्कथन
- पूर्ववृत्त के पुनर्परीक्षण की आवश्यकता
- शाहजहाँ के बादशाहनामे को स्वीकारोक्ति
- टैवर्नियर का साक्ष्य
- औरंगजेब का पत्र तथा सद्य:सम्पन्न उत्खनन
- पीटर मुण्डी का साक्ष्य
- शाहजहाँ-सम्बन्धी गल्पों का ताजा उदाहरण
- एक अन्य भ्रान्त विवरण
- विश्व ज्ञान-कोश के उदाहरण
- बादशाहनामे का विवेचन
- ताजमहल की निर्माण-अवधि
- ताजमहल की लागत
- ताजमहल के आकार-प्रकार का निर्माता कौन?
- ताजमहल का निर्माण हिन्दू वास्तुशिल्प के अनुसार
- शाहजहाँ भावुकता-शून्य था
- शाहजहाँ का शासनकाल न स्वर्णिम न शान्तिमय
- बाबर ताजमहल में रहा था
- मध्ययुगीन मुस्लिम इतिहास का असत्य
- ताज की रानी
- प्राचीन हिन्दू ताजप्रासाद यथावत् विद्यमान
- ताजमहल के आयाम प्रासादिक हैं
- उत्कीर्ण शिला-लेख
- ताजमहल सम्भावित मन्दिर प्रासाद
- प्रख्यात मयूर-सिंहासन हिन्दू कलाकृति
- दन्तकथा की असंगतियाँ
- साक्ष्यों का संतुलन-पत्र
- आनुसंधानिक प्रक्रिया
- कुछ स्पष्टीकरण
- कुछ फोटोग्राफ











