लोगों की राय

पौराणिक >> अभिज्ञान

अभिज्ञान

नरेन्द्र कोहली

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2010
पृष्ठ :232
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 4429
आईएसबीएन :9788170282358

Like this Hindi book 4 पाठकों को प्रिय

10 पाठक हैं

कृष्ण-सुदामा की मनोहारी कथा...

चौदह


अपने ग्राम के निकट पहुंचते-पहुंचते झुटपुटा-सा हो गया था। विचित्र स्थिति हो रही थी। मन में घर पहंचने की उथल-पथल मची हई थी। बार-बार सशीला और बच्चों का ध्यान आता था। अधिक देर हो गयी तो ज्ञान और विवेक सो जायेंगे। वे उनसे बातें नहीं कर पायेंगे। सुशीला को उन्हें एक-एक बात सुनानी थी। उसी ने तो भेजा था द्वारका। कितनी आतुरता से उनकी प्रतीक्षा कर रही होगी। उसे एक-एक बात में रुचि होगी : जाते हुए मार्ग कैसे कटा? कृष्ण कैसे मिले ? कृष्ण की पत्नियां कैसे मिलीं? और कौन-कौन मिला? किससे क्या बात हुई? कृष्ण ने क्या दिया?

सुदामा को एक संकोच ने जकड़ लिया।...क्या बतायेंगे कि कृष्ण ने उन्हें क्या दिया? किस-किसको समझायेंगे...और अभी थोड़ी देर में ग्राम की सीमा आरम्भ हो जायेगी। उनके परिचित लोग मिलने लगेंगे।...अपरिचितों से तो सुदामा भाग आये हैं। अब परिचित...जाने कहां क्या-क्या समाचार पहंचा है। मार्ग में धर्मशाला का प्रबन्धक कह रहा था कि ग्राम-प्रमुख ने डोंडी पिटवा दी है कि इस ग्राम का नाम सुदामापुरी है ...तो अन्य समाचार भी पहुंचे ही होंगे। उनकी अनुपस्थिति में जाने क्या-क्या कहा और सुना गया होगा। जाने लोग कैसे मिलेंगे उनसे?...उनकी निर्धनता के कारण उन्हें नगण्य ही मानेंगे?...या कृष्ण के मित्र के रूप में उनका सत्कार होगा?...या कृष्ण के माध्यम से अपना कोई काम बनवाने के लिए चाटुकारों का मण्डल उनके आस-पास घिर आयेगा?

जब तक सुदामा सारी स्थिति को अच्छी प्रकार जान ही न जायें, वे किसी का सामना नहीं करना चाहते थे।...अच्छा है, थोड़ा विलम्ब और हो जाये। अन्धकार पूरी तरह छा जाये। तब सुदामा चुपके से अपने घर जा पहुंचेंगे।...यह कौन द्वारका नगरी है कि मार्ग पर प्रकाश होगा और रात में भी नागरिकों के रथ आते-जाते होंगे।...छोटा-सा गाँव है। अंधेरा हुआ कि दिन-भर के काम-काज से थके-मांदे लोग खा-पीकर सो रहेंगे। किसको पता लगेगा कि सुदामा लौट आये हैं।

मार्ग से कुछ हटकर सुदामा पेड़ों की ओट में यथासम्भव छिपकर बैठ गये। दूर से किसी की दृष्टि पड़ भी गयी तो यही समझेगा कि कोई पथिक सुस्ता रहा है। सुदामा ने अपना गमछा सिर पर लपेट लिया...हां! ऐसे कोई उन्हें जल्दी पहचान भी नहीं पायेगा।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

    अनुक्रम

  1. अभिज्ञान

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book