विवेकानन्द साहित्य >> ध्यान तथा इसकी पद्धतियाँ ध्यान तथा इसकी पद्धतियाँस्वामी विवेकानन्द
|
127 पाठक हैं |
प्रस्तुत है पुस्तक ध्यान तथा इसकी पद्धतियाँ।
भगवान् से ज्ञान के प्रकाश लिए प्रार्थना
“मैं उस सत्ता की महिमा का चिन्तन करता हूँ, जिसने विश्व की रचना की है, वह मेरे मन को प्रबुद्ध करे।"
बैठो और दस-पन्द्रह मिनट इस भाव का ध्यान करो।
अपनी अनुभूतियों को अपने गुरु के अतिरिक्त और किसीको न बताओ। यथासम्भव कम से कम बात करो।
अपना चिन्तन सद्गुणों पर लगाओ; हम जैसा सोचते हैं, वैसे ही बन जाते हैं।
पवित्र चिन्तन हमें अपनी समस्त मानसिक मलिनताओं को भस्म करने में सहायता देता है। (४.८२)
|