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इतिहास और राजनीति >> भारत की एकता का निर्माण

भारत की एकता का निर्माण

सरदार पटेल

प्रकाशक : प्रकाशन विभाग प्रकाशित वर्ष : 2005
पृष्ठ :350
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 62
आईएसबीएन :

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स्वतंत्रता के ठीक बाद भारत की एकता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा देश की जनता को एकता के पक्ष में दिये गये भाषण


मै आपको यह भी साफ-साफ बता देना चाहता हूँ कि मैं जो यह अन्तरावलोकन कर रहा हूँ, वह एक निपट निराशावादी या विश्वासहीन व्यक्ति के रूप में नहीं कर रहा। बल्कि यह तो मैं एक पैदायशी आशावादी के रूप में कर रहा हूँ। मुझसे ज्यादा उन गुणों को और कौन जान सकता है, जो हमने, हमारे देश ने, अपनी आजादी के पहले ही साल में दिखाए हैं और जिन बातों से हमारी साख बड़ी है। अगर मैं अपने अवगुणों पर जोर दे रहा हूँ, तो वह केवल एक चेतावनी के रूप में दे रहा हूँ, जिससे कि हम गाफिल न हो जाएँ। जिससे हम अपने कौंमी पुनर्निर्माण के काम में पक्के इरादे से लग जाएँ। हमारा कर्तव्य है कि आज जब हमारी आजादी का यह शिशु केवल साल भर का है, हम इस बात का पक्का प्रबन्ध करें कि यह बालक बड़ा हो और स्वस्थ, ताकतवान् और हट्टा-कट्टा बने।

मैं यह नहीं चाहता कि इसको सब तरफ से बचाकर रखा जाए। इसको तो जीवन संघर्ष के बीच में रह कर ही बढ़ना चाहिए। उसी हवा में पलने से यह तगड़ा होगा। तभी इसमें तेज आएगा। उसी तेज के बल पर यह दुनिया का सामना करेगा। हमें अपनी आजादी की बुनियाद मजबूती से और बिलकुल ठीक-ठीक रखनी चाहिए क्योंकि इसी बुनियाद पर हमें एक विशाल भवन बनाना है। एक ऐसा भवन, जो हमारे पूर्वजों से मिली हमारी महान सम्पत्ति के योग्य होगा, जो आजकल के युग का गर्व होगा और जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनमोल विरासत होगा। केवल आजादी की रक्षा करना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि हमें तो यह साबित करना है कि हम इसके योग्य हैं। इस देश में जो छोटे-से-छोटा भी है, हमें उसे भी यह महसूस कराना है कि वह आजाद है। खेत मे काम करने वाले किसानों, झोपड़ों में रहने वाले गरीबों और कारखानों में काम करने वाले मजदूरों-सभी को इस योग्य होना चाहिए कि वे गुलामी और आजादी के भेद को समझ सकें। तभी हम यह कह सकेंगे कि हमने आजादी ली है और उसके योग्य बन गए हैं।

इसलिए हमें अपनी आजादी को संगठित करना है अपनी एकता और शक्ति को बनाना है। पिछले जमाने में जो हम पिछड़ गए थे, उस कमी को आज हमें पूरा करना है और इस मुल्क को पहले से बहुत अधिक अच्छा और स्वस्थ बनाना है। यह कर लेने पर ही हम अपने संकुचित उद्देश्यों और क्षुद्र आकांक्षाओं पर ध्यान दे सकते हैं। लोगों को यह समझना चाहिए कि जिस समय हमने आजादी पाई, अगर उस समय हम आजाद न हुए होते तो हमें कैसे-कैसे संकटों का सामना करना पड़ता। हम लोग उन परिस्थितियों को भी जानते हैं, जिनसे भारी तबाही हो सकती थी और जिनका हमने पिछले वर्ष में सफलता से मुकाबला किया है। यह सब कुछ इसी कारण सम्भव हुआ कि राष्ट्र का हृदय सच्चा है, और हमारी सच्ची अन्तर्भावनाएँ और हमारी श्रद्धा शुरू के इन झगड़ों को सफलतापूर्वक सम्हाल सकती थी।

अगर हमने उन बुरी प्रवृत्तियों को, जो अब दिखाई दे रही हैं और जिनकी चर्चा मैंने अभी-अभी की है, बढ़ने दिया तो इससे बहुत से खतरे पैदा हो जाएँगे। हम लोग मुसीबतों में फँस जाएँगे और दल-दल में धँसते चले जाएँगे। वैसा हुआ तो हम अपनी आजादी का गला, उसके पैदा होने के लगभग तुरन्त बाद ही घोंट देंगे। हिन्द का इतिहास हमें बताता है कि हमने अपनी आजादी उन संकुचित उद्देश्यों और स्वार्थपूर्ण आकांक्षाओं के बदले में दे डाली थी, जिन्होंने हमारे बड़े उद्देश्यों और राष्ट्रीय अभिलाषाओं को ढक लिया था। राष्ट्रीय संकट के उस युग में जब हर एक का यह कर्तव्य था कि वह देश की रक्षा में अपना कन्धा लगाए, हमारे देश के कई भागों में फुट पड़ गई और वह अलग-अलग दलों में बँट गया। व्यक्तिगत आकांक्षाओं ने हमें राष्ट्रीय हितों की ओर से अन्धा कर दिया और आपसी नफरत ने एकता और अनुशासन की सारी भावनाओं को नष्ट कर दिया। आज हमें यह समझ लेना चाहिए कि किसी कौम के लिए अपने इतिहास के पाठ को भूल जाना खतरे से खाली नहीं होता।

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    अनुक्रम

  1. वक्तव्य
  2. कलकत्ता - 3 जनवरी 1948
  3. लखनऊ - 18 जनवरी 1948
  4. बम्बई, चौपाटी - 17 जनवरी 1948
  5. बम्बई, शिवाजी पार्क - 18 जनवरी 1948
  6. दिल्ली (गाँधी जी की हत्या के एकदम बाद) - 30 जनवरी 1948
  7. दिल्ली (गाँधी जी की शोक-सभा में) - 2 फरवरी 1948
  8. दिल्ली - 18 फरवरी 1948
  9. पटियाला - 15 जुलाई 1948
  10. नई दिल्ली, इम्पीरियल होटल - 3 अक्तूबर 1948
  11. गुजरात - 12 अक्तूबर 1948
  12. बम्बई, चौपाटी - 30 अक्तूबर 1948
  13. नागपुर - 3 नवम्बर 1948
  14. नागपुर - 4 नवम्बर 1948
  15. दिल्ली - 20 जनवरी 1949
  16. इलाहाबाद - 25 नवम्बर 1948
  17. जयपुर - 17 दिसम्बर 1948
  18. हैदराबाद - 20 फरवरी 1949
  19. हैदराबाद (उस्मानिया युनिवर्सिटी) - 21 फरवरी 1949
  20. मैसूर - 25 फरवरी 1949
  21. अम्बाला - 5 मार्च 1949
  22. जयपुर - 30 मार्च 1949
  23. इन्दौर - 7 मई 1949
  24. दिल्ली - 31 अक्तूबर 1949
  25. बम्बई, चौपाटी - 4 जनवरी 1950
  26. कलकत्ता - 27 जनवरी 1950
  27. दिल्ली - 29 जनवरी 1950
  28. हैदराबाद - 7 अक्तूबर 1950

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