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इतिहास और राजनीति >> भारत की एकता का निर्माण भारत की एकता का निर्माणसरदार पटेल
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स्वतंत्रता के ठीक बाद भारत की एकता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा देश की जनता को एकता के पक्ष में दिये गये भाषण
फतह मैदान, हैदराबाद
२० फरवरी, १९४९
हैदराबाद रियासत के रहनेवाले भाइयो और बहनो,
आप लोगों से मिलने का यह पहला ही मौका मुझे मिला है और इस मुलाकात से मैं बहुत खुश हूं। बहुत दिनों से आपसे मिलने की मेरी इच्छा थी। आप जानते है कि पिछले कुछ दिनों में आप लोगों को बहुत कष्ट उठाना पड़ा और उधर हम लोगों को भी आपकी वजह से एक प्रकार की निद्राविहीन रातें काटनी पड़ी। हम सब को बहुत परेशानी हुई, लेकिन परमात्मा की कृपा से सारा काम इस तरह हो गया कि आप लोगों का कष्ट भी कम हो गया और हमारी इज्जत भी बच गई। नहीं तो, काम तो होता ही, लेकिन दुनिया में हमारी बदनामी होती और नुकसान भी बहुत होता। अब कई लोग मुझको सलाह दे रहे हैं कि मुझे क्या करना चाहिए। बहुत से लोग बिना माँगे ही अच्छी-अच्छी राय दे रहे हैं और मुझे सबकी राय सुननी भी चाहिए। सो मैं सुन भी रहा हूँ। जब यह मुसीबत उठी थी, तब भी बहुत लोगों ने मुझे इसी तरह राय दी थी और जवाब में मैंने कहा था कि आप लोग हम पर भरोसा कीजिए और ईश्वर पर भरोसा कीजिए; सब ठीक हो जाएगा। आपने देखा कि ईश्वर पर भरोसा रखने से हमारा काम बिगड़ता नहीं है। तो आज भी जो लोग मुझे अच्छी-अच्छी सलाहें दे रहे हैं, कि मैं जल्दी में सब बातों का फैसला दूं। हम इसको उठा दें, उसको उठा दें या इसको बैठावें, उसको बैठावें। उन सबको मैं अदब से एक सलाह देना चाहता हूँ कि जैसी आप लोगों की चिन्ता है, उससे हमारी चिन्ता कम नहीं है। हम भी रात-दिन यही बातें सोचते हैं। हैदराबाद के दो करोड़ निवासियों की भी हमको बहुत फिकर रहती है। आपकी सलाह के लिए मैं आपका बहुत शुक्रगुजार हूँ। लेकिन काम तो मुझे अपनी अक्ल से ही करना होगा। आप भरोसा कीजिए कि हम वही कार्य करेंगे जिससे हैदराबाद के लोगों का भला होगा, दूसरी तरह का कोई काम हम नहीं करेंगे। तो आपको हम पर भरोसा रखना चाहिए।
आपको समझना चाहिए कि जब तक हैदराबाद रियासत में पूरी शान्ति नहीं होती, तब तक रियासत में राज्य की क्रान्ति करना यह बड़ी भयंकर चीज़ है। हमें यहाँ कोई ऐसा एक्सपेरीमेंट या तजुर्बा नहीं करना है कि जिससे हैदराबाद की रियासत को जोखिम हो या इसके लोगों का नुकसान हो। हमने एक बात तो आप से पहले ही साफ-साफ कह दी थी, कि हैदराबाद का भविष्य क्या होगा, इसका फैसला आप लोगों को करना है, हमें नहीं करना है। सारी दुनिया में हमने एलान किया है कि हैदराबाद का भविष्य अच्छा या बुरा बनाना उसके निवासियों का काम है। लेकिन उसमें हमारी भी काफ़ी जिम्मेवारी है, इस लिए अपना बोझ भी हम फेंक नहीं सकते। तो आप सबको यह समझ लेना चाहिए कि किस रास्ते पर चलने से हैदराबाद का भला होगा और हम क्या करें जिससे दुनिया के लोग और मुल्क के लोग समझ लें कि हैदराबाद के लोग सयाने और समझदार हैं। इसी से आपकी इज्जत बढ़ेगी और इसी से आपका भला होगा। जब आपके यहाँ कौमी जहर का वायुमण्डल बन गया था और जहर की बाढ़ें चलती थीं, तो उसमें भले-बुरे सभी लोग बह गए थे। जो काम कभी नहीं करने चाहिए, वे काम भी किए गए। लेकिन उस बुराई का नतीजा भी सब को भोगना पड़ा। बुरे लोगों को, आपको और कुछ दरजे तक हमको भी भोगना पड़ा। क्योंकि जब आग भड़कती है, तो उसमें से जो चिनगारियां उड़ती हैं, उनसे आस-पासवालों को भी कुछ-न-कुछ नुकसान पहुँचता ही है। तो अब वह बाढ़ निकल गई है। जो मैल उभर आया था, वह अब बैठ रहा है। अब पानी शान्त और निर्मल हो गया है। उसको हमें फिर से मैला नहीं करना, बल्कि गंगा के जैसा निर्मल करना है। उसका इलाज यही है कि सब कौमों के लोग पिछली बातें भूल जाए। ऐसा समझ लें कि उन्होंने एक बुरा स्वप्न देखा था। अब तो सही रास्ते पर
चलने के लिए हमें अपना मार्ग साफ करना है। हमें भी इस काम में आप लोगों को मदद देनी है। आपको यह समझ लेना चाहिए कि आपको हैदराबाद का भविष्य स्वयं बनाना है। इसमें हमारा और कोई स्वार्थ नहीं है।
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- वक्तव्य
- कलकत्ता - 3 जनवरी 1948
- लखनऊ - 18 जनवरी 1948
- बम्बई, चौपाटी - 17 जनवरी 1948
- बम्बई, शिवाजी पार्क - 18 जनवरी 1948
- दिल्ली (गाँधी जी की हत्या के एकदम बाद) - 30 जनवरी 1948
- दिल्ली (गाँधी जी की शोक-सभा में) - 2 फरवरी 1948
- दिल्ली - 18 फरवरी 1948
- पटियाला - 15 जुलाई 1948
- नई दिल्ली, इम्पीरियल होटल - 3 अक्तूबर 1948
- गुजरात - 12 अक्तूबर 1948
- बम्बई, चौपाटी - 30 अक्तूबर 1948
- नागपुर - 3 नवम्बर 1948
- नागपुर - 4 नवम्बर 1948
- दिल्ली - 20 जनवरी 1949
- इलाहाबाद - 25 नवम्बर 1948
- जयपुर - 17 दिसम्बर 1948
- हैदराबाद - 20 फरवरी 1949
- हैदराबाद (उस्मानिया युनिवर्सिटी) - 21 फरवरी 1949
- मैसूर - 25 फरवरी 1949
- अम्बाला - 5 मार्च 1949
- जयपुर - 30 मार्च 1949
- इन्दौर - 7 मई 1949
- दिल्ली - 31 अक्तूबर 1949
- बम्बई, चौपाटी - 4 जनवरी 1950
- कलकत्ता - 27 जनवरी 1950
- दिल्ली - 29 जनवरी 1950
- हैदराबाद - 7 अक्तूबर 1950








