|
इतिहास और राजनीति >> भारत की एकता का निर्माण भारत की एकता का निर्माणसरदार पटेल
|
|
||||||
स्वतंत्रता के ठीक बाद भारत की एकता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा देश की जनता को एकता के पक्ष में दिये गये भाषण
अगर हमें अपनी प्रणाली बदलनी है, तो वह इस प्रकार से बदलनी चाहिए, जैसा कि हमने पहला काम किया। उसमें कम-से-कम नुकसान हुआ है। यह ढाँचा भी हमें इस सफाई से बदलना चाहिए कि जिससे कम-से-कम नुकसान हो। यदि हम ऐसा नहीं करेंगे तो हमने अभी जो इतना बड़ा काम किया है, वह भी हम बिगाड़ देंगे। इसमें आपका भी भला नहीं है और हमारे लिए तो वह बदनामी का कारण बनेगा ही। हम बदनामी नहीं चाहते। आप हिन्दुस्तान के बीच में पड़े हैं। एक तरह से हिन्दुस्तान के दो हिस्से हो गए हैं और जिन लोगों ने हमारे मुल्क में इस प्रकार का आन्दोलन शुरू किया था, वे लोग जो चाहते थे, वह उन्हें मिल गया। अब हमारे मुल्क में वैसे ही कोई लोग हों, जो मानते हों कि हमारे मुल्क में दो अलग-अलग नेशन (कौम) हैं, तो उन लोगों को बहुत जल्द, वहीं अपना स्थान बना लेना चाहिए, जहां उनकी नेशन के लोग गए हैं। किसी के दिल में ऐसी ख्वाहिश हो, और जिसकी सहानुभूति रात दिन वहीं रहती हो, जिसकी वफादारी वहीं रहती हो, वह खुदा को याद करके वहीं चले जाएँ, तो अच्छा होगा। क्योंकि ऐसा न करने से उनको भी नुकसान होगा, पाकिस्तान को भी नुकसान होगा और हमको भी नुकसान होगा। तो, मैं यह नहीं मानता हूँ कि अब ऐसे कोई लोग भारत में हैं और मैं यह भी मानता हूँ कि यदि हैदराबाद में कोई लोग ऐसे हैं, जिनके दिमाग में अभी तक कोई ऐसी चीज़ बाकी है कि हैदराबाद का भविष्य बनाने में, या हैदराबाद की हुक्मत को रखने या पलटने में बाहर की कोई सत्ता या बाहर का कोई इंसान, किसी तरह से दखल दे सकता है। अगर कोई है, तो वह धोखे में है और यह उसका पागलपन है। मैं कहता हूँ कि बाहर की कोई ताकत हमारे मुल्क में दखल नहीं दे सकती, क्योंकि यह हमारा भीतरी मामला है। कोई उसमें किसी प्रकार की न मदद कर सकता है, न किसी प्रकार का दखल दे सकता है। इसी तरह हैदराबाद का भविष्य क्या होगा, यह निश्चय करना आप ही लोगों का काम है। इसमें दूसरा कोई कुछ नहीं कर सकता। लेकिन मैं आपको यह कहना चाहता हूँ कि इस बात की बड़ी फिक्र है कि जिन लोगों पर यह बोझ पड़नेवाला है, उन लोगों के कन्धे इतने मजबूत् नहीं हैं कि वे इस बोझ को आराम से उठा सकें। तो इसके लिए मै आप सब लोगों से खास करके उन लोगों से, जिन्होंने पिछले ५,१० सालों में कुर्बानियाँ की हैं, बहुत नम्रता से कहूँगा कि आप लोगों का प्रथम कर्त्तव्य यह है कि आप हैदराबाद का वायुमण्डल बदलें। उसमें आप की पूरी जिम्मेवारी रहेगी।
जो लोग उम्मीद रखते हैं कि हैदराबाद की रियासत का बोझ उन्हें उठाना है, उनको मैं मुबारकबाद दूंगा। लेकिन साथ ही मैं यह भी कहूँगा कि यह बोझ उठाना बहुत बड़ी बात है। यह आसान बात नहीं है। आपका यह सद्भाग्य है कि इस युग में आपका जन्म हुआ, जब कि हिन्दुस्तान की तवारीख लिखी जा रही है, इतिहास बनाया जा रहा है और इस जमाने में आप इस महत्वपूर्ण जिम्मेवारी पर बैठे हैं। तो आपको यह देखना चाहिए कि हैदराबाद के जिन निवासियों ने कुछ बुराइयाँ या गलतियाँ भी की हैं और आज वे हैदराबाद के नव-निर्माण में भाग लेने के लिए तैयार हैं, तो उन्होंने जो कुछ पहले किया है, वह सब आपको भूल जाना चाहिए। अब वैसी कोई चीज आपको बीच में नहीं लानी है। तो, जिन लोगों ने स्वतन्त्रता के मैदान में कुर्बानी की, उनको मुबारक है। वे उसके लिए मगरूब हो सकते हैं। मगर जिन लोगों ने कुर्बानी की, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि अब और भी ज्यादा कुर्बानी करने का वख्त आया है। अब आप दिखाइए कि आपके कन्धों में कितनी ताकत है। तब आपकी कदर होगी और तब इतिहास में आपको जगह मिलेगी। यह पावर पोलिटिक्स (शक्ति राजनीति) का मामला नहीं है, यह पद के लिए दौड़-धूप करने का मामला नहीं है और मेरी उम्मीद है कि हैदराबाद की कांग्रेस पर चाहे हमारा कुछ भी प्रभाव न हो, लेकिन हिन्दुस्तान की कांग्रेस का नाम उसने लिया है और इस तरह हिन्दुस्तान की कांग्रेस का वह बच्चा है। उसके हाथ में हिन्दुस्तान की कांग्रेस की इज्जत है। तो अगर उनके कामों से उनकी इज्जत में कुछ भी बट्टा लगे, तो वे हैदराबाद को नुकसान पहुँचाएँगे और मुल्क को नुकसान पहुँचाएँगे। मुझे आशा है कि ये लोग अपनी जिम्मेवारी समझेंगे।
यह देख कर मुझे बहुत खुशी होती है कि आपमें से बहुत से लोगों ने यह वायदा दिया है कि इस प्रकार का कोई काम नहीं करेंगे, जिससे हमें उनके लिए कोई चिन्ता करने की जरूरत पड़े। मैं उन सबको मुबारकबाद देता हूँ। इन लोगों ने काफी काम किया है, काफी कुर्बानी की है। कई लोग कहते हैं कि ऐसे लोगों को राज देने से क्या होगा। यों तो लोग हमारे बारे में भी कहते थे कि जो ज़िन्दगी भर जेल में पड़े रहे, वे लोग क्या राज करेंगे? लेकिन अब जमाना बदल गया है और जो लोग प्रजा के प्रतिनिधि हैं, उन्हीं के पास राजसत्ता जाने वाली है। लोग पूछते हैं कि आपका लीडर कौन होगा? आप जिसे चुनेंगे, वही आपका नेता होगा। हमने आज जो इन्तजाम किया है, वह तो एक टैम्परेरी (अस्थाई) चीज है। हमने हैदराबाद में आज जो कुछ व्यवस्था बनाई है, यह व्यवस्था एक ''केअर टेकर गवर्नमेंट'' (इन्तजामी सरकार) है, जिसका मतलब यह है कि आप लोग अपना बोझ उठाने के लिए जब तक अपने लीडर तैयार कर लेंगे, वहाँ तक के लिए यह सरकार है। लेकिन उसका जो स्थायी ढाँचा बनाने का काम है, वह आपके हाथ में है।
|
|||||
- वक्तव्य
- कलकत्ता - 3 जनवरी 1948
- लखनऊ - 18 जनवरी 1948
- बम्बई, चौपाटी - 17 जनवरी 1948
- बम्बई, शिवाजी पार्क - 18 जनवरी 1948
- दिल्ली (गाँधी जी की हत्या के एकदम बाद) - 30 जनवरी 1948
- दिल्ली (गाँधी जी की शोक-सभा में) - 2 फरवरी 1948
- दिल्ली - 18 फरवरी 1948
- पटियाला - 15 जुलाई 1948
- नई दिल्ली, इम्पीरियल होटल - 3 अक्तूबर 1948
- गुजरात - 12 अक्तूबर 1948
- बम्बई, चौपाटी - 30 अक्तूबर 1948
- नागपुर - 3 नवम्बर 1948
- नागपुर - 4 नवम्बर 1948
- दिल्ली - 20 जनवरी 1949
- इलाहाबाद - 25 नवम्बर 1948
- जयपुर - 17 दिसम्बर 1948
- हैदराबाद - 20 फरवरी 1949
- हैदराबाद (उस्मानिया युनिवर्सिटी) - 21 फरवरी 1949
- मैसूर - 25 फरवरी 1949
- अम्बाला - 5 मार्च 1949
- जयपुर - 30 मार्च 1949
- इन्दौर - 7 मई 1949
- दिल्ली - 31 अक्तूबर 1949
- बम्बई, चौपाटी - 4 जनवरी 1950
- कलकत्ता - 27 जनवरी 1950
- दिल्ली - 29 जनवरी 1950
- हैदराबाद - 7 अक्तूबर 1950








