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इतिहास और राजनीति >> भारत की एकता का निर्माण

भारत की एकता का निर्माण

सरदार पटेल

प्रकाशक : प्रकाशन विभाग प्रकाशित वर्ष : 2005
पृष्ठ :350
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 62
आईएसबीएन :

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स्वतंत्रता के ठीक बाद भारत की एकता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा देश की जनता को एकता के पक्ष में दिये गये भाषण


कई लोग कहते हैं कि जल्दी सें-जल्दी इस गवर्नमेंट को हटा कर दूसरी डाक सरकार बनानी चाहिए। हम भी चाहते हैं कि हम क्यों बोझ उठाएँ। हम अपने हाथ में जिम्मेवारी क्यों रखें? आप लोग खुद अपनी जिम्मेवारी उठाइए। हम यह करने के लिए तैयार हैं। लेकिन हम इस प्रकार की गाड़ी आपके सुपुर्द करना चाहते हैं कि यदि आप कुछ धक्का भी न लगाएँ, तो कई दिन तो अपने-आप ही चलती रहे। लेकिन हम आपको ऐसी गाड़ी भी नहीं देना चाहते जो शुरू ही में पटरी से उतर जाए। ऐसा हो तो उसमें आप लोग मर जाएँगे और हमारी भी बदनामी होगी। ऐसी सलाह जो लोग देते हैं, उनसे मैं कहता हूँ कि आप हैदराबाद की आबोहवा तुरन्त ऐसी बना लें, जिसमें हम जल्दीसे जल्दी अपने अफ्सरों को यहाँ से हटा लें। हमारे पास अपने लिए भी पूरे आफीसर्स नहीं हैं। लेकिन आपको यह समझना चाहिए कि ९० फी सदी या उससे भी ज्यादा पुराने अफसरों या पुराने काम करने वाले लोगों का दिल दूसरी तरफ था, उनकी राय दूसरी थी, अब हमें उनको रास्ते पर लाना है। उनको तुरन्त फेंक देना ठीक नहीं। उनका दोष भी नहीं था। हम इस तरह कर भी नहीं सकते, क्योंकि इस तरह राज नहीं चल सकता। उनको उठा-उठा कर फेंक देना, यह कोई लायक आदमियों का काम नहीं है। उन पुराने लोगों में से जो वफादारी से और योग्यता से काम करने के लिए तैयार हैं, उनको तो हमने रखा ही है। भले पिछली हुकूमत के जमाने में उन्होंने कुछ गलत भी काम किया हो। वे गलतियाँ हमें याद नहीं करनी चाहिए। भविष्य में वे क्या करने वाले हैं, यह हमें देखना है। कई लोग हम से कहते हैं कि उनका विश्वास कैसे किया जाय। उनमें से मैंने बहुत से ऐसे अफसरों का विश्वास किया है, जिनके साथ हम जिन्दगी भर लड़े, जिन्होंने हमें जेलों में डाला। विश्वास रखना हमारा काम है, लेकिन जो विश्वासघात करे, उसका घात करना भी हमारा धर्म हो जाता है। (तालियाँ)

तो आप लोगों को पुराने अफसरों से डरना नहीं चाहिए। लेकिन परमात्मा ने हमको हैदराबाद के दो करोड़ आदमियों की जिम्मेवारी दी है और यह जिम्मेवारी हम फेंक नहीं देंगे। मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि हम लोग हैदराबाद में आए और यहाँ हम ने एक केअर टेकर गवर्नमेंट बनाई, उसको कितना टाइम लगा? पिछले दिनों में यहाँ कितनी मार-काट हुई? मैंने सुना है कि अभी तक यहाँ ऐसे लोग हैं जो औरों को भी मारने की तैयारी में हैं। हमें चीन और बर्मा से सबक लेना चाहिए। हमारे देश के आसपास जो चल रहा है, जो आग फैल रही है, उसी आग में हमें हिन्दुस्तान को नहीं जलाना है। सारी जिन्दगी बरबाद कर हम लोगों ने आज़ादी इसलिए नहीं ली। यह जो आज़ादी हमें मिल गई है, वह हमें हजम करनी है। हमें ऐसा काम भी नहीं करना है कि हिन्दुस्तान के लोग कहने लगें कि इस आजादी से तो पहली गुलामी ही बेहतर थी। हम लोग जो रात-दिन मेहनत कर रहे हैं उसका उद्देश्य यही है कि आप लोग खुद अपना बोझ उठाने के लिए तैयार हो जाओ। हमारे जो चन्द कांग्रेस के काम करने वाले लोग इतने दिनों के बाद बाहर आए हैं, मालूम नहीं पिछले दिनों वह क्या काम करते थे? चन्द दिनों से वे बाहर निकले है। वह देख ही रहे हैं कि कितने लोग उनका साथ देते हैं।

आप लोग खाली एक-एक वोट देने के लिए तैयार हो जाएँ, केवल उससे काम नहीं चलेगा। यहाँ हैदराबाद में जो पुरानी पोलीस है, उनका दिल किसी चीज में नहीं है। वे इस प्रकार की हालत में पड़े हैं कि सारी ज़िन्दगी जो काम किया, अब उसी से उल्टा काम करना पड़ता है। हम लोगों ने जो थोड़ी-सी पोलीस बाहर से लाकर रक्खी है, वह यहाँ के लोगों को जानती नहीं, उनको पहिचानती नहीं। उन्हें अभी यह मालूम नहीं कि यहाँ चोर कौन है और साहूकार कौन है। और जब पकड़ने का समय आता है, तो बहुत से लोग कहने लगते हैं, मैं तो कोई साम्यवादी नहीं हूँ, समाजवादी नहीं हूँ, मै तो कांग्रेसमैन हूं। लेकिन जब पकड़ने वाले लोग चले जाते हैं, तो तुरन्त मालूम पड़ जाता है कि वह तो झूठ बात कहते थे। तो आज तक हैदराबाद में एक तरह से काम चला। हमारे लोगों के इधर आने तक कांग्रेस वाले यहाँ काम करते थे। कांग्रेस ने यहाँ काफ़ी कुर्बानी की। लेकिन जिस तरह से काम करना चाहिए, उस तरह से सब लोग काम नहीं कर सके। क्योंकि कई लोग समझे कि अगर हम अहिंसा से, सत्य से, और ठीक तरह से काम लेने के लिए जाएँगे तो हमको कोई मौका मिलने वाला नहीं है। तो जो हथियार सामने आया, उसी का उपयोग करने लगे। कई लोग तो मेरे पास भी आए और कहते थे कि हमको ५,००० राइफल दो तो हम हैदराबाद सर करेंगे। मैं उनसे कहता था कि अपना दिमाग ठीक करके आओ, तुम पागल हो। हम लोग जानते है कि हमारे पास राइफलें तो बहुत पड़ी हैं, लेकिन यहाँ काम राइफल का नहीं है। यह काम इस तरह से नहीं हो सकता। जिन लोगों ने यहाँ रात-दिन काम किया, उनमें से बहुत से कांग्रेसमैन हैं। असल में कांग्रेस का जो दो प्रकार का काम था, उसमें से एक प्रकार का काम तो बिल्कुल नहीं किया गया। यह काम था प्रजा की सेवा करना, रचनात्मक काम करना और लोगों को सही रास्ते पर लाना। वह काम बिलकुल नहीं किया गया। जो प्रजा की सेवा करना चाहता है, वह कैसी भी हुकूमत क्यों न हो, चुपचाप प्रजा की सेवा करता है। लेकिन अब तो हमें सेवा का सारा दरवाजा खोल देना है। आप लोग उसके लिए तैयार हो जाओ। लेकिन अब हम किसी को वह रास्ता देने वाले नहीं है, जिसमें लूटमार का मौका हो, जिसमें धोखाबाज़ी का मौका हो और जहाँ खाली पोलिटिक्स के पीछे दौड़ना हो।

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    अनुक्रम

  1. वक्तव्य
  2. कलकत्ता - 3 जनवरी 1948
  3. लखनऊ - 18 जनवरी 1948
  4. बम्बई, चौपाटी - 17 जनवरी 1948
  5. बम्बई, शिवाजी पार्क - 18 जनवरी 1948
  6. दिल्ली (गाँधी जी की हत्या के एकदम बाद) - 30 जनवरी 1948
  7. दिल्ली (गाँधी जी की शोक-सभा में) - 2 फरवरी 1948
  8. दिल्ली - 18 फरवरी 1948
  9. पटियाला - 15 जुलाई 1948
  10. नई दिल्ली, इम्पीरियल होटल - 3 अक्तूबर 1948
  11. गुजरात - 12 अक्तूबर 1948
  12. बम्बई, चौपाटी - 30 अक्तूबर 1948
  13. नागपुर - 3 नवम्बर 1948
  14. नागपुर - 4 नवम्बर 1948
  15. दिल्ली - 20 जनवरी 1949
  16. इलाहाबाद - 25 नवम्बर 1948
  17. जयपुर - 17 दिसम्बर 1948
  18. हैदराबाद - 20 फरवरी 1949
  19. हैदराबाद (उस्मानिया युनिवर्सिटी) - 21 फरवरी 1949
  20. मैसूर - 25 फरवरी 1949
  21. अम्बाला - 5 मार्च 1949
  22. जयपुर - 30 मार्च 1949
  23. इन्दौर - 7 मई 1949
  24. दिल्ली - 31 अक्तूबर 1949
  25. बम्बई, चौपाटी - 4 जनवरी 1950
  26. कलकत्ता - 27 जनवरी 1950
  27. दिल्ली - 29 जनवरी 1950
  28. हैदराबाद - 7 अक्तूबर 1950

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