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जीवनी/आत्मकथा >> बसेरे से दूर बसेरे से दूरहरिवंशराय बच्चन
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आत्म-चित्रण का तीसरा खंड, ‘बसेरे से दूर’। बच्चन की यह कृति आत्मकथा साहित्य की चरम परिणति है और इसकी गणना कालजयी रचनाओं में की जाती है।
मुझसे पूछा गया था, डिग्री आप ईसाई पद्धति से लेंगे या गैर-ईसाई पद्धति से। शायद डिग्री देते समय जो शपथ दिलाई जाती है वह एक में फादर, सन एण्ड होली गोस्ट के नाम पर होगी, दूसरी में सिर्फ परमात्मा के नाम पर अन्तर समझ में तो आने वाला था नहीं, फिर भी मैंने कह दिया था, गैर-ईसाई पद्धति से।
काश, तेजी और बच्चे यहाँ मौजूद होते और मुझे डिग्री लेते देखते।
ऐसे अवसरों पर अपने प्रियजनों का अभाव बहुत खलता है। शोक शायद हम अकेले भी मना लें, खुशी मनाने के लिए दो-चार अपने निकट होने ही चाहिए।
हेन और श्रीमती हेन मुझे डिग्री लेते देखने के लिए आ गये थे।
बावा अपना कैमरा लेकर आया था। उसने बाहर मेरी कुछ तस्वीरें लीं।
मिसेज़ हेन बोली, 'आज मैं तुमको पी-एच० डी० के शानदार गाउन में देखने की प्रत्याशा कर रही थी।'
मि० हेन ने उनका हाथ दबाया। वे मेरी आर्थिक स्थिति से अनभिज्ञ न थे। मिसेज़ हेन ने उनका संकेत समझा, और फिर पी-एच० डी० के गाउन की बात न की।
मेरे दो साथी अपने पी-एच० डी० गाउन में पास ही खड़े थे, उन्हें भी मेरे साथ ही डिग्री मिली थी।
एक हीन भावना का मन में उठना स्वाभाविक है।
मैंने पी-एच० डी० का गाउन और हुड दुकानों पर शीशे के लम्बे केसों से सजा अक्सर देखा था। अक्सर उनके सामने से जाते हुए सोचा था, एक दिन मैं ऐसा गाउन पहनने का अधिकारी बनूँगा, कितनी बार अपनी पीठ पर उस गाउन की कल्पना भी की थी, अच्छा सजता मुझ पर।
आज जब मैं उसे पहनने का अधिकारी हूँ, उसे नहीं पहन सका, नहीं खरीद सका।
लाचारी अपने को सन्तोष देने के बहुत से तर्क खोज लेती है।
गाउन न पहनने से मेरी डिग्री तो मुझसे नहीं छिन जायेगी।
"दिल के बहलाने को गालिब यह खयाल अच्छा है'
रात को कॉलेज में मुझे डिनर पर बुलाया गया। चूँकि सेंट कैथरीन्स कॉलेज से डॉक्टरेट लेने वाला एकमात्र मैं था, इसलिए मुझे टेबल पर प्रमुख स्थान दिया गया।
आज जो भी मुझे सम्बोधित करता है डा० बच्चन कहता है। नाम से पहले यह विशेषण पहले-पहल सुनता हूँ तो अनभ्यस्त होने से कभी-कभी लगता है जैसे किसी दूसरे को बुलाया जा रहा है।
खाना खत्म होने के बाद ऐन्टी-रूम में बैठता हूँ। सभी लोग मेरे शोध की उपलब्धि पर मुझसे बात करना चाहते हैं। मुझसे कोई बात करे भी तो किस विषय पर ! मैं दो वर्ष से ऊपर इस विषय पर इतनी बातें करता-सुनता रहा हूँ कि अब चाहता हूँ लोग मुझसे इसकी चर्चा बन्द करें। अब मैंने अपने दिमाग का गियर बदल दिया है।
घर लौटने के सपने देख रहा हूँ।
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